Hindigram

  • अक्षर का आकार बडाईयॆ
  • अक्षर का पुर्वनीयोजित कद
  • अक्षर का आकार घटाइऐ

सुभाषित

अमंत्रं अक्षरं नास्ति , नास्ति मूलं अनौषधं
अयोग्यः पुरुषः नास्ति, योजकः तत्र दुर्लभ:
शुक्राचार्य
कोई अक्षर ऐसा नही है जिससे (कोई) मन्त्र शुरु होता हो , कोई ऐसा मूल (जड़) नही है , जिससे कोई औषधि बनती हो और कोई भी आदमी अयोग्य नही होता , उसको काम मे लेने वाले (मैनेजर) ही दुर्लभ हैं