Hindigram

  • अक्षर का आकार बडाईयॆ
  • अक्षर का पुर्वनीयोजित कद
  • अक्षर का आकार घटाइऐ
Home

सुभाषित 9

ई-मेल मुद्रण पीडीएफ़

अमंत्रं अक्षरं नास्ति , नास्ति मूलं अनौषधं
अयोग्यः पुरुषः नास्ति, योजकः तत्र दुर्लभ:
शुक्राचार्य
कोई अक्षर ऐसा नही है जिससे (कोई) मन्त्र शुरु होता हो , कोई ऐसा मूल (जड़) नही है , जिससे कोई औषधि बनती हो और कोई भी आदमी अयोग्य नही होता , उसको काम मे लेने वाले (मैनेजर) ही दुर्लभ हैं

Comments (0)
Write comment
Your Contact Details:
Comment:
[b] [i] [u] [url] [quote] [code] [img]   
:angry::0:confused::cheer:B):evil::silly::dry::lol::kiss::D:pinch:
:(:shock::X:side::):P:unsure::woohoo::huh::whistle:;):s
:!::?::idea::arrow:
Security
Please input the anti-spam code that you can read in the image.

!joomlacomment 4.0 Copyright (C) 2009 Compojoom.com . All rights reserved."

 

सुभाषित

जब फ़ांसी की सज़ा से बचने के लिए गैलेलिओ ने चर्च से क्षमा मांग ली तो उसके एक अनुयायी ने गुस्से और निराशा में टिप्पणी की: 'कितना अभागा होता है वह समाज, जिसका कोई नायक नहीं होता।'

महान वैज्ञानिक गैलेलियो का उत्तर था :' लेकिन उससे अभागा होता है वह समाज, जिसे नायक की ज़रूरत होती है।'